देश के समस्त शिक्षा प्रेमियों को शिक्षक दिवस पर शुभकामनायें
शिक्षक दिवस पर विशेष
पथ को जो आलोकित कर दें।
मन मस्तिष्क प्रतिबिंबित कर दें।
प्राणी मात्र को ज्ञान से विभूषित कर दें।
ऐसे गुरु को शत-शत नमन।
अंतर्मन को जो दीप्त कर दे।
हृदय तार को झंकृत कर दे।
अंधकार उर में प्रकाश भर दे।
ऐसे गुरु को शत-शत नमन।
मूढ़मती को बुद्धिमती बनाएं।
जो हमें सद मार्ग दिखाएं।
कलुषित मन को उज्जवल बनाएं।
ऐसे गुरु को शत-शत नमन।
गागर में सागर भर दे।
अल्प ज्ञानी सुमनों को
विकसित कर दें।
हृदय में ज्ञान अंबुधि लिए
नव किसलय में स्नेहिल
सृजन करें।
ऐसे गुरु को शत-शत नमन।
ज्योतिर्मय जग कर दे।
दुर्गम पथ को सुगम कर दे।
कठिन विषय को सरल कर दे।
जड़ बुद्धि को विमल कर दें।
ऐसे गुरु को शत-शत नमन।
*आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।*
स्वरचित एवं मौलिक
प्रतिमा यादव (पंखुड़ी)
*गोरखपुर* साभार !
शिक्षक और उसका योगदान…..
शिक्षक तो हैं साधक।
बुद्धि शुद्धि का दायक।
करो अभिनंदन वादन।
श्री गणपति उच्चारण।
प्रशस्ति के हैं कारक।
संस्कृति सत्य सुधारक।
समाज के यही उद्धारक।
इंद्र धनुषि प्रकाशक।
अध्यात्म प्रेमी आंचल।
पूर्ण परसिद्धि चालक।
सभ्यता का देखे लालच।
नही राजनीति साधन।
आसा से जन्मे अनुशासन।
विश्वाश के गहरे संशोधन।
प्रेरणा के शुद्ध संचालक।
मां शारदे के मोन उपासक।
चाणक्य भक्ति में गौरव।
ऋषि संत द्रोण मनमोहक।
संबंधों में ग्वाला माधव।
सिंहासन पर संधि वाचक।
गुरु शिक्षक सही यथावत।
कवि जगदीश प्रसाद।
मेरठ उत्तर प्रदेश।
शिक्षक दिवस
5 सितंबर , 2024
समस्त माताओं बहनों एवं बंधुओं को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई एवं बहुत बहुत शुभकामनाऍं ।
शिक्षक
शि – शिकस्त क्ष – क्षारता क – कर्मण्यता
जो छात्रों के जीवन से क्षारता ( अवगुण ) को शिकस्त देते हुए कर्मण्यता को निवेश कर दे वह शिक्षक कहलाता है ।
शिक्षक शिक्षा की पहचान है ,
जिनका शिक्षा क्षेत्र पयान है ,
हर छात्रों को सुयोग्य बनाना ,
भारत देश का यह अरमान है ।
छात्रों के अवगुण कर दे दूर ,
शिक्षित करता जिसे भरपूर ,
भारत को वह शिक्षक प्यारा ,
शिक्षा जगत का शिक्षक शूर ।
शिक्षक शिष्य को शिष्ट बनाए ,
शिष्ट से ऊपर विशिष्ट बनाए ,
सद्गुण को ही उजागर करके ,
सद्गुण को शिखर पहुॅंचाए ।
हर छात्रों में जो प्यार जगा दे ,
अंतर्मन से जो तकरार मिटा दे ,
भटके मार्ग से जो छात्रों को ,
जीवन के सत्य मार्ग दिखा दे ।
छात्रों द्वारा सुंदर समाज बने ,
कल से सुंदर यह आज बने ,
छात्र ही राष्ट्र के सुंदर भविष्य ,
छात्र ही समाज का नाज बने ।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन कृति ,
शिक्षा जगत से जिन्हें प्रीति ,
शिक्षक को जो सम्मान दिया ,
शिक्षक दिवस महान नीति ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
डुमरी अड्डा
छपरा ( सारण )
बिहार ।
**एक शिक्षक के भाव**
गर लेखनी उठाऊँ तो क्या लिखूं गुरु पर,
प्रथम गुरु है मेरे मात-पिता सबसे ऊपर ….
जन्म दिया पाला -पोषा अपने हिस्से का सुख देकर ,
अपनी खुशियाँ वार दी मुझ पर मेरा दुख दर्द लेकर ,
मेरी कलम छोटी है मात-पिता का कर्ज है मुझ पर
गर लेखनी उठाऊँ तो क्या लिखूं गुरु पर…..
द्वितीय गुरु है मेरे गुरूजन जिनने मुझे शिक्षा दी,
कलम पकड़कर लिखना सिखाया अक्षर और भाषा दी,
उनकाे शत् -शत् प्रणाम है जिनके दम पर आज हूं,
कदम- कदम नित नई राह दिखाई ,
ज्ञान का दीप जलाकर कर दिए न्योछावर संस्कार मुझ पर,
गर लेखनी उठाऊँ तो क्या लिखूं गुरु पर….
तीसरे गुरु यह दुनिया वाले अच्छा बुरा सिखाने वाले,
दो- चार अक्षर सीख कर किताबें हमें पढाने वाले ,
खुद अंधेरे में बसर कर रोशनी हमारी चुराने वाले,
अपनी लकीर को बड़ा कर हमारी लकीर को मिटाने वाले,
हुनर तो आ गया मुझे भी यह सब देखकर,
गर लेखनी उठाऊँ तो क्या लिखूं गुरु पर…..
चौथे गुरु है मेरे घर वाले मेरे बच्चे भी ,
कुछ भी करें कुछ भी कहे हैं एकदम सच्चे भी,
मुँह पर और पीठ पीछे भी हैं एक जैसे ,
गलत को गलत और सही के लिए अच्छे भी ,
उन्हीं से पा लिया ‘राज’ सब कुछ हार कर ,
गर लेखनी उठाऊँ तो क्या लिखूं गुरु पर ….
शिक्षक दिवस के अवसर पर सबको करती हूंँ बारंबार प्रणाम,
सबके आशीर्वाद से शिक्षा जगत में चमकता रहे मेरा नाम…. ✍️✍️🙏🙏
स्वरचित मौलिक
संध्या सुनील जैन राज भिलाई छत्तीसगढ़
सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं💐💐
सभी कवियों का उनकी बेहतरीन रचना हेतु JHVP भारत न्यूज़ का हार्दिक आभार एवम बधाई.




