बिहार के सबसे गरीब जिलों की लिस्ट आई सामने, टॉप पर किसका नाम? जानिए राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी
बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने राज्य की आर्थिक प्रगति की नई दिशा तय की है.

JHVP BHARAT NEWS/ BIHAR KI NEWS
EDITED BY: परवेज़ भारतीय
पटना। बिहार के सबसे गरीब जिलों की लिस्ट आई सामने, टॉप पर किसका नाम? जानिए राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी

Bihar Poorest District: बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने राज्य की आर्थिक प्रगति की नई दिशा तय की है. जहां बिहार 10% की शानदार विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है, वहीं जिलों के बीच आय की असमानता एक चिंता का विषय है.

बिहार, जो अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, वर्तमान में विकास की नई इबारत लिख रहा है. हाल ही में बिहार सरकार ने बजट से ठीक पहले राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया है.
इस रिपोर्ट ने राज्य की आर्थिक सेहत का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने रख दिया है. जहां एक ओर बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत को टक्कर दे रही है, वहीं दूसरी ओर जिलों के बीच प्रति व्यक्ति आय का भारी अंतर अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
अगर औसत आय की बात करें, तो बिहार की प्रति व्यक्ति औसत आय अब 76,490 रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि, यह आंकड़ा पूरे राज्य का औसत है, लेकिन जब हम जिलावार गहराई में जाते हैं, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है.
आर्थिक सर्वेक्षण ने राज्य के सभी 38 जिलों की रैंकिंग जारी की है. इस रैंकिंग में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर तीन जिले सबसे निचले पायदान पर हैं. शिवहर जिला इस सूची में सबसे नीचे है. यहां की प्रति व्यक्ति आय मात्र 18,980 रुपये है. छोटा भौगोलिक क्षेत्र और औद्योगिक संसाधनों की कमी इसके मुख्य कारण माने जा सकते हैं.
गरीबी की इस सूची में दूसरे स्थान पर सीमांचल का अररिया जिला है. यहां प्रति व्यक्ति आय 19,795 रुपये दर्ज की गई है. तीसरे नंबर पर सीतामढ़ी जिला आता है, जहां प्रति व्यक्ति आय 21,448 रुपये है.
विकास के दूसरे छोर पर वे जिले हैं जो राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं. इनमें राजधानी पटना का कोई मुकाबला नहीं है. 1,31,332 रुपये की प्रति व्यक्ति आय के साथ पटना राज्य का सबसे संपन्न जिला है. सरकारी सेवाओं, व्यापार और शिक्षा का केंद्र होने के कारण यहां की आय राज्य के औसत से कहीं अधिक है.
द्योगिक गतिविधियों और रिफाइनरी के कारण बेगूसराय 61,566 रुपये की आय के साथ दूसरे नंबर पर है. इस सूची में तीसरा स्थान मुंगेर का है, जहां प्रति व्यक्ति आय 54,469 रुपये है.
आर्थिक सर्वेक्षण में किसी जिले को अमीर या गरीब घोषित करने के लिए केवल कागजी आंकड़ों का सहारा नहीं लिया गया है. इसके लिए ठोस संकेतकों का उपयोग किया गया है, जैसे- पेट्रोल और डीजल की खपत, जिस जिले में वाहनों और मशीनों का उपयोग अधिक है, वहां आय अधिक मानी गई.
एलपीजी की खपत, रसोई गैस का उपयोग जीवन स्तर को दर्शाता है. प्रति व्यक्ति बैंक बचत और निवेश के आधार पर भी आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है. बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 एक मिली-जुली तस्वीर पेश करता है. एक तरफ पटना और बेगूसराय जैसे जिले तरक्की की राह पर हैं, तो दूसरी तरफ शिवहर और अररिया जैसे जिलों को अभी और अधिक सरकारी ध्यान और निवेश की जरूरत है.





गुडमॉर्निंग सर
बिहार सरकार को यथाशीघ्र युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के आसान रास्ते खोलने होंगे… पलायन तभी रुकेगा.
बिहार में गुजरात और महाराष्ट्र की तरह ही कल कारखना भी खोलने चाहिए. धन्यवाद