सिंधु जल संधि पर फिर रोया पाकिस्तान, भारत को दी धमकी, बोला- पानी रोका तो यह युद्ध की शुरुआत होगी
भारत कई ऐसे वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है जिनसे सिंधु नदी प्रणाली बदल सकती है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साझा संसाधनों के समझौते-आधारित प्रबंधन की रक्षा करने का आग्रह किया।

JHVP BHARAT NEWS/ WORLD NEWS
EDITED AND ACCURATED BY: PARWEZ ALAM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर भारत को धमकी दी है। पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अंतरराष्ट्रीय फोरम पर धमकी दी है कि अगर भारत ने पानी रोका तो यह युद्ध की शुरुआत होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत कई ऐसे वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है जिनसे सिंधु नदी प्रणाली बदल सकती है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साझा संसाधनों के समझौते-आधारित प्रबंधन की रक्षा करने का आग्रह किया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने क्या कहा
ब्रसेल्स में सीमा-पार जल प्रबंधन पर एक कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली बोलते हुए, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि भारत सिर्फ बयानबाजी से आगे बढ़कर ऐसे कदम उठा रहा है जिनसे 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) के तहत बने ढांचे को खतरा है। यह संधि दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। इशाक डार का यह बयान भारत और पाकिस्तान में सिंधु जल संधि को लेकर बढ़े तनाव के बीच आया है।

भारत पर लगाया बड़ा आरोप
डार ने कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह बताना जरूरी है कि हमारी चिंताएं सिर्फ भारत के बयानों पर आधारित नहीं हैं। भारत ने अपने आक्रामक बयानों के बाद गैर-कानूनी कदम भी उठाए हैं।” उन्होंने कहा कि भारत संधि के दायरे में आने वाली नदियों पर जलाशय, विस्तार और पानी का रास्ता बदलने (डायवर्जन) जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि कम से कम 17 ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जिनसे नदी प्रणाली में बड़ा बदलाव आ सकता है और नई दिल्ली को “हाइड्रो हेजेमनी” (जल पर प्रभुत्व) के साधन मिल सकते हैं।

कहा- भारत पानी के अधिकार से वंचित कर रहा
उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वी पड़ोसी की जानबूझकर 24 करोड़ लोगों को पानी के उनके जायज अधिकार से वंचित करने की घोषित नीति एक बहुत बड़ी तबाही का संकेत है।” डार ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा संधि और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दिए गए तरीकों से विवादों को सुलझाने की कोशिश की है। उन्होंने तर्क दिया कि मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष पहले स्थापित कानूनी ढांचों के दायरे में रहे हैं।

भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया
उन्होंने कहा, “पानी को कभी भी दबाव डालने के हथियार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक साझा संसाधन है, एक साझा ज़िम्मेदारी है और आखिरकार मानवीय गरिमा और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है।” उन्होंने साझा जलमार्गों पर यूरोपीय सहयोग का उदाहरण दिया कि कैसे सीमा-पार संसाधनों का प्रबंधन शांतिपूर्ण ढंग से बाध्यकारी समझौतों के जरिए किया जा सकता है।




