क्या पृथ्वी पर बड़े संकट का है खतरा? ….धरती के ऊपर 20 हजार सालों से चल रहा विशालकाय तूफान, 50 साल बाद वैज्ञानिकों को मिली जानकारी
वैज्ञानिक हमेशा ये कहते आए हैं कि ब्लैक होकर मैटर को कंज्यूम करने के बाद एनर्जी प्रोड्यूस करते हैं, जिससे मैटर उनके आसपास के क्षेत्र से दूर धकेला जाता है. इसी प्रक्रिया को ब्लैक होल विंड्स नाम दिया गया है. ये बात सैजिटेरियस ए स्टार पर भी लागू होती है. हालांकि, यह डस्ट और ब्लैक होल गैस को बेहद कम मात्रा में ही निगलता है.

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ACCURATED BY: PARWEZ ALAM

Science News: रहस्यों से भरे हमारे ब्रह्मांड में आए दिन कुछ न कुछ नया खुलासा होते रहता है. वहीं अब 50 सालों की खोज के बाद वैज्ञानिकों ने हमारी गैलक्सी में स्थित एक विशालकाय ब्लैक होल सैजिटेरियस ए स्टार (Sgr A*)से निकलने वाली शक्तिशाली हवाओं के प्रमाण खोजे हैं. वैज्ञानिक हमेशा ये कहते आए हैं कि ब्लैक होकर मैटर को कंज्यूम करने के बाद एनर्जी प्रोड्यूस करते हैं, जिससे मैटर उनके आसपास के क्षेत्र से दूर धकेला जाता है. इसी प्रक्रिया को ब्लैक होल विंड्स नाम दिया गया है. ये बात सैजिटेरियस ए स्टार पर भी लागू होती है. हालांकि, यह डस्ट और ब्लैक होल गैस को बेहद कम मात्रा में ही निगलता है.
कैसे लगा पता?
वैज्ञानिकों ने यह खोज तब कि जब उन्होंने ब्लैक होल में कोन के आकार की एक खाली जगह को देखा. उन्हें पहले लगा कि यह तारों से निकलने वाली हवा है. हालांकि, जब उन्होंने अपना कैलकुलेशन किया, तो पाया कि स्टार्स की हवा में इतनी ऊर्जा नहीं होती कि इस तरह का विशाल खाली हिस्सा बना सकें.
कैसे हुई खोज?
वैज्ञानिकों ने इस खोज के लिए अलमा और चंद्रा एक्स-रे टेलीस्कोप की मदद ली. इसकी इमेज में पाया गया कि ठंडी गैस में स्थित खाली जगह से एक्स-रे एमिशन भी निकल रहा था. इस दौरान एक्स रे डाटा और मॉलिक्यूलर फीचर्स एक लाइन में आ गए. टीम की को-लीडर लीना मर्चिकोवा ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि एक्स-रे इमेज और हमारी इमेज एक साथ मिली, तो स्पष्ट हो गया कि वहां वाकई में ब्लैक होल की हवाएं मौजूद हैं.
धरती के लिए खतरा है यह तूफान?
अब सवाल ये है कि क्या मिल्की वे के सेंटर में चल रहा यह तूफान खतरनाक है, तो बता दें कि इसका जवाब न है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 20,000 सालों से यह तूफान चल रहा है, लेकिन हमारी धरती इस ब्लैक होल से 26,000 लाइट-ईयर की दूरी पर है. ऐसे में हमारी दुनिया पर इस तूफान का कोई सीधा असर नहीं पड़ने वाला है. इस खोज से साफ पता चलता है कि हमारा ब्लैक होल बेहद शांत है.
भविष्य पर इस रिसर्च का असर
स्पेस साइंस के इतिहास में यह खोज मील का पत्थर साबित हो सकती है. इससे ब्लैक होल के शांत जीवन को समझने का बड़ा अवसर मिला है. वहीं अब सैजिटेरियस ए स्टार से हमें पता चलेगा कि अपने शांत समय में ब्लैक होल क्या करते हैं. इसको लेकर मर्चिकोवा ने कहा,’ इससे पता चलता है कि हमारा ब्लैक होल विश्व में अनोखा या अकेला नहीं है.’ हमारे ब्लैक होल के पास भी गैस मौजूद है, जो उसे लगातार फीड कर रही है. आने वाले समय में वैज्ञानिक इस हवा की डायरेक्शन में होने वाले बदलावों के बारे में भी खोज करेंगे.





