सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश मामले में बिहार सरकार, चुनाव आयोग और मंत्री को जारी किया नोटिस
Deepak Kushwaha Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बिना विधायक बने दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने के खिलाफ याचिका पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे, बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।

JHVP BHARAT NEWS / BIHAR POLITICS DESK
EDITED BY: PARWEZ ALAM
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार, चुनाव आयोग और दीपक प्रकाश को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है।
याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। यदि वह इस अवधि में सदन का सदस्य नहीं बनता है तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि दीपक प्रकाश को नवंबर 2025 में मंत्री बनाया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर वे किसी सदन के सदस्य नहीं बने। इसके बावजूद मई 2026 में नई मंत्रिपरिषद के गठन के बाद उन्हें फिर से मंत्री पद की शपथ दिला दी गई। याचिका में इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार, चुनाव आयोग और दीपक प्रकाश से जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि वे वर्तमान में पंचायती राज मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
याचिका में मांग की गई है कि अदालत दीपक प्रकाश की पुनर्नियुक्ति को असंवैधानिक घोषित करे तथा उनके मंत्री पद पर बने रहने की वैधता की जांच करे। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होने की संभावना है।
गौरतलब है कि दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। इस मामले को लेकर बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है।


