जब इंदिरा गांधी ने कहा, ‘हिन्दुस्तान किसी से नहीं डरता, चाहे सातवां बेड़ा हो या सत्तरवां’
अगर अवैध रूप से कुछ भारतीय किसी भरोसा या भ्रम में अमेरिका चले गए तो.. इतने वर्षो से उनको वहाँ क्यों रहने दिया गया?

JHVP BHARAT NEWS
जब इंदिरा गांधी ने कहा, ‘हिन्दुस्तान किसी से नहीं डरता, चाहे सातवां बेड़ा हो या सत्तरवां’

ये भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शब्द हैं। अमेरिका के लिए। आज से करीब 55 साल पहले। तब भारत अपेक्षाकृत गरीब देश था। खाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं थे। हरित क्रांति आधे रास्ते में थी। लेकिन देश के पास स्वाभिमान था। डरना नहीं है।

3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान ने पश्चिमी भारत के आठ सैनिक अड्डों पर हमला किया। पाकिस्तान की योजना थी कि पहले हमला बोलकर भारत को क्षति पहुंचाई जा सकेगी। लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जनरल मानेकशॉ बरसात के पहले से तैयारी कर रहे थे, उन्हें अंदाजा था कि युद्ध आने वाला है। वे इस मौके के इंतजार में थे कि पहले पाकिस्तान हमला करे।
पाकिस्तान की फौज पूर्वी और पश्चिमी सीमा पर एक साथ हमलावर थी। पाकिस्तान की योजना थी कि पश्चिम में जैसलमेर और लोगोंवाल एयरबेस पर कब्जा कर लिया जाए। भारतीय सेना ने पूरी योजना के साथ दोनों मोर्चों पर एकसाथ जवाबी कार्रवाई शुरू की और आरपार के लिए बिगुल फूंक दिया। भारत के नौसेना प्रमुख ने इंदिरा गांधी से पूछा, अगर हम करांची तक घुसकर उनके बंदरगाह पर हमला करें तो राजनीतिक दखलंदाजी तो नहीं होगी? *इंदिरा गांधी ने कहा, ‘जनरल, अगर युद्ध छिड़ गया तो छिड़ गया’।* जनरल ने कहा, ‘मुझे जवाब मिल गया है’।
पूर्वी पाकिस्तान में जब तक विरोधी सेना कुछ समझ पाती, जनरल जेएस अरोड़ा के अभूतपूर्व नेतृत्व में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान को पूरी तरह घेर लिया। पूर्वी पाकिस्तान में भारतीय सेना घुस गई। ढाका को घेर लिया और गवर्नर के बंगले पर बमबारी कर दी। गवर्नर मेज के नीचे घुस गया और इस्तीफा लिखकर मेज पर रखा और भाग गया। पाकिस्तानी सेना के कमांडर जनरल नियाजी मेज के नीचे घुसकर फफक कर रोने लगे। उन्हें इस हमले की भनक तक नहीं लगी थी। भारत के तीन मिसाइल बोट ने पाकिस्तान में घुसकर करांची बंदरगाह को जला दिया। पाकिस्तानी सेना जवाब भी नहीं दे सकी।
अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने पाकिस्तान की ओर से हस्तक्षेप किया। भारत को आक्रमणकारी घोषित किया, कई तरह के प्रतिबंध थोपे और संयुक्त राष्ट्र में युद्ध विराम का प्रस्ताव ले गए। रूस भारत के साथ खड़ा था, उसने वीटो कर दिया। रूस की भारत के साथ संधि थी जिसके तहत उसने अपना बेड़ा भेज दिया था कि भारत पर हमला रूस पर हमला माना जाएगा।
उधर पश्चिमी सीमा पर भारत में घुस आए 40 टैंकों को वायुसेना ने ध्वस्त कर दिया था और पाकिस्तानी वापस भाग गए थे।
निक्सन ने 9 दिसंबर को अमेरिका का सातवां युद्धक बेड़ा भारत की ओर रवाना किया। *प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा, ‘हिन्दुस्तान किसी से नहीं डरता, चाहे सातवां बेड़ा हो या सत्तरवां’।* अमेरिका ने सेना वापस लेने का दबाव बनाया तो इंदिरा गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा, *’कोई देश भारत को आदेश देने का दुस्साहस न करे.’*
अमेरिका के जवाब में जनरल मानेकशॉ ने आदेश दिया, भारत की सैनिक योजना को और तेज कर दिया जाए। पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी फौज को घेर लिया गया था। भारतीय सेना इस तरह से लड़ रही थी कि पाकिस्तानी सेना को लगा कि पूरा पूर्वी पाकिस्तान घिर चुका है। भारतीय सेना के जनरल जैकब ने प्रस्ताव रख दिया कि अब या तो आत्मसमर्पण या फिर मौत…. नतीजतन मात्र 3000 भारतीय जांबाजों ने 93000 सैनिकों का सार्वजनिक समर्पण करवा लिया। अमेरिका मुंह देखता रह गया और पाकिस्तान के साथ पूरी दुनिया सन्न रह गई। 3 दिसंबर को शुरू हुआ युद्ध 13 दिसंबर को समाप्त हो गया। अमेरिका का सातवां बेड़ा भारत तक कभी नहीं पहुंचा।
बीबीसी से इंदिरा गांधी ने कहा था, ‘हम लोग इस बात पर निर्भर नहीं हैं कि दूसरे देश क्या सोचते हैं या हम क्या करें या वे हमसे क्या करवाना चाहते हैं, हम यह जानते हैं कि हम क्या करना चाहते हैं और यह कि हम क्या करने जा रहे हैं। चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो।’
आज हम देख रहे हैं कि प्रधानमंत्री, जो अपनी पालतू आईटी सेल से खुद को शेर कहलवाते हैं , अमेरिका जाकर वहां एक पार्टी के लिए, एक व्यक्ति के लिए ‘अबकी बार, हिटलर सरकार’ टाइप नारा लगाते हैं . उसी राष्ट्रपति के नेतृत्व में भारतीयों को हथकड़ी लगाकर, बेड़ियों में जकड़कर बेरहमी के साथ भारत भेजा जाता है और ये दिलेर शेर मुंह तक नहीं खोल पाते (जानकारी सुत्राधार से ) ।
अगर किसी कथन से किसी भी व्यक्ति को ठेस लगे, क्षमा प्रार्थी।
लेकिन पहले देश है फिर कोई और । देश हित में अमेरिका जापान पर बिना सोचे विचारे मानवता का दुश्मन एटम बम गिरा दिया,, वो दुनिया की भलाई कैसे चाहेगा?
दुनिया को शुरू से ही लड़ा लड़ा कर जो देश अपना हथियार बेचता रहा, वो इंसानियत का दुश्मन ही होगा,,.
अगर अवैध रूप से कुछ भारतीय किसी भरोसा या भ्रम में अमेरिका चले गए तो.. इतने वर्षो से उनको वहाँ क्यों रहने दिया गया? अब क्यों उनके साथ बर्बरता या पशुवत व्यवहार किया जा रहा है,, जबकि अमेरिका भारत का दोस्त होने का दावा कर रहा है?????
एक भावुक लेख के साथ आपके भाई परवेज़ भारतीय.


