टॉप न्यूज़देशरचना संसार और आपकी कलमराजनीति
Trending

2 अक्टूबर जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है मुख्य बिंदुओं को समझने की कोशिश करते हैं.

लाल बहादुर शास्त्री बनाम महात्मा गाँधी

2 अक्टूबर जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है मुख्य बिंदुओं को समझने की कोशिश करते हैं!

मन में थी अहिंसा की लगन नंगा बदन भाईचारा अमन चैन स्वतंत्रता के लिए घूमे थे हजारों किलोमीटर

गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था पिता कर्मचंद गांधी माता पुतलीबाई पत्नी कस्तूरबा गांधी मोहनदास करमचंद गांधी की शादी 13 वर्ष की उम्र में हो गई थी बापूजी के बच्चे, हरी लाल, मणिलाल, रामदास, देवदास, जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात पोरबंदर में हुआ था मृत्यु 30 जनवरी 1948 को लगभग 5: 17 मिनट शाम को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर 78 वर्षीय गांधी जी की हत्या कर दी थी नाथूराम गोडसे एक हिंदू महासभा का सदस्य था उसने महात्मा गांधी पर पाकिस्तान का पक्ष लेने का आरोप लगाया और अहिंसा के सिद्धांत का विरोध किया

महात्मा गांधी भारतीय इतिहास के एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने देश हित के लिए अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी और आजादी के आंदोलन के एक ऐसे नेता थे जिन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी और अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था महात्मा गांधी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पिता कहा गया बापू के सत्य व अहिंसा की विचार धारा से मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला भी काफी प्रभावित हुए अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता को खत्म करने व भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने में बापू का अहम योगदान था उनकी सत्य और अहिंसा की नीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की उन्होंने अहिंसक तरीके से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ ना केवल आवाज उठाई बल्कि कई आंदोलनों की अगुवाई की गांधीजी की सादगी और सरलता की दुनिया कायल थी

गांधी जी के पिता ब्रिटिश राज में कठियावाड़ा की एक रियासत के दीवान थे.गांधी जी का जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था विवाह के 2 साल बाद उनके पिता का निधन हो गया और पिता की मृत्यु के 1 साल बाद उनकी पहली संतान हुई और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई
लेकिन हर मुश्किल परिस्थिति में बापू ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी 1887 में अहमदाबाद से हाईस्कूल की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1888 में वकालत की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन गए 9891 में गांधीजी वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत वापस लौटे

लेकिन नौकरी के सिलसिले में महज 23 साल की उम्र में उन्हें दक्षिण अफ़्रीका जाना पड़ा उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय श्रमिकों खनन मजदूरों और खेतिहर मजदूरों को एकजुट किया भारतीयों के साथ अमानवीय व्यवहार और भेदभाव के खिलाफ भारतीय कांग्रेस का गठन किया और अंग्रेजी शासन के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई 21 साल दक्षिण अफ्रीका में रहने के बाद गांधीजी 1915 में भारत लौट आए

गांधी जी ने भारत की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई भारत लौटने के बाद गांधी ने देश की स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया वह एक कुशल राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने अंग्रेजी राज से भारत की मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ी और गरीब भारतीयों से अधिकारों के लिए आवाज उठाई वह देश भर में घूमते रहे और लोगों को अपने देश भक्ति के बारे में जागरूक किया पूरी दुनिया खुद को अहिंसा के पुजारी के रूप में याद करती है दक्षिण अफ्रीका मैं एक दौरान डरबन से प्रोटीरिया की यात्रा करते समय उन्हें तीसरे श्रेणी के डिब्बे में बैठने से रोका गया और उन्हें धक्का मार कर व पीटकर ट्रेन से बाहर निकाल दिया गया जबकि उनके पास फर्स्ट क्लास का टिकट था वह नस्लीय भेदभाव कारण था जो अंग्रेजों को अफ़्रीका में ही नहीं भारत में भी महंगा पड़ा साल 1915 में अफ्रीका से भारत लौटने के बाद महात्मा गांधी अपने गुरु गोपाल कृष्ण के पास पहुंचे इस दौरान देश गुलामी की जंजीरों में बना हुआ था महात्मा गांधी ने देश के हालात को समझने के लिए देश के भ्रमण की योजना बनाई साथ ही देश में जाति व धर्म के भेदभाव को खत्म करने व सविनय अवज्ञा आंदोलन असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन चलाया

मुख्य आंदोलन दक्षिण अफ्रीका में असहयोग आंदोलन स्वराज नमक सत्याग्रह हरिजन आंदोलन निश्चय दिवस भारत छोड़ो आंदोलन राष्ट्रपिता बापू की उपाधि मिली प्रसिद्ध वाक्य अहिंसा परमो धर्म सिद्धांत सत्य अहिंसा ब्रह्मचर्य शाकाहारी सदकर्म बोल पर नियंत्रण

संयुक्त राष्ट्र महासभा न 15 जून 2007 को 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया था यह दिन भारत देश आजादी के बाद राष्ट्रीय अवकाश के रूप में घोषित किया गया देश के सभी राज्यों में तथा केंद्र शासित प्रदेशों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है महात्मा गांधी शांति सत्य और अहिंसा के प्रतीक थे उनके आंदोलन ने पूरे भारत में सफलता हासिल की

बाल दिवस शिक्षक दिवस फ्रेंडशिप डे आदि दुनिया में शांति और अहिंसा लाने के लिए उनका मुख्य योगदान रहा था 2 अक्टूबर को पूरे भारत में कई आयोजन किए जाते हैं जैसे प्रार्थना सेवाएं गांधी के जीवन और आंदोलनों को दर्शाने वाली फिल्में स्मारक समारोह आदि स्वतंत्रता के संघर्ष में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए याद किया जाता है उनके उद्देश्य एक ऐसे नए समाज का निर्माण करना था जो अहिंसक और इमानदार व्यवहार करता हो
गांधी जी ने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते समय संयम और करुणा दोनों का अनुपालन करने की सलाह दी और स्वयं इनका पालन करके मिसाल कायम करते हुए नेतृत्व प्रदान किया वह अपना शौचालय स्वयं साफ करते थे और आसपास के वातावरण की स्वच्छता सुनिश्चित करते थे सभी को स्वच्छता अभियान का संदेश दिया पानी कम से कम बर्बाद हो और अहमदाबाद में इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि दूषित जल साबरमती के जल में ना मिले

गांधी जयंती के समय राज घाट नई दिल्ली में प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री महात्मा गांधी के इसमार्ग पर प्रार्थना के दौरान मौजूद रहते हैं जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था

गांधीजी का पसंदीदा भक्ति गीत रघुपति राघव राजा राम उनकी याद में गाया जाता है भारत में स्कूल कॉलेजों द्वारा हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा सरकारी संस्थाओं में भी इस तरह के आयोजन किए जाते हैं और छात्र छात्राएं उत्साह से गांधी जयंती समारोह में भाग लेते हैं इस दिन पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है

छात्र-छात्राओं द्वारा बापू के सत्य और अहिंसा संदेश पर आधारित गीत गाया जाता है तथा कविताओं का पाठ करते हैं और गांधीवादी दर्शन पर अपनी खुद की जगह पेश करते हैं छोटे बच्चे इस कार्यक्रम को गांधी जी की पोशाक के साथ राष्ट्रवादी गीतों की प्रस्तुति देकर मनाते हैं तथा छात्र बैनर का उपयोग करते हुए रैली में भाग लेते हैं जो पूरे देश में शांति और अहिंसा के महत्व को दर्शाता है पूरे भारत में लोग प्रार्थना सेवा स्मारक समारोह और श्रद्धांजलि देते हैं कला विज्ञान और निबंध की प्रतियोगिताओं का प्रदर्शन कर अहिंसक जीवन जीने के लिए पुरस्कार की प्रस्तुति होती हैं पूरे भारत में लोगों द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा पर सुंदर फूलों की माला और फूल अर्पित की जाती हैं कुछ लोग इस दिन मांस और शराब से बचते हैं

महात्मा गांधी जी को पांच बार नोबेल शांति पुरस्कार से नामित किया गया महात्मा गांधी जी 4 महाद्वीपों और 12 देशों में नागरिक अधिकार आंदोलन के लिए जिम्मेदार माने जाते थे 1913 से 1938 तक वे लगभग 79000 किलोमीटर चले

महात्मा गांधी ने बोअर युद्ध सेना में सेवा की भयानक युद्ध के चित्र को देखकर उन्होंने हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की ठानी.गांधी जी ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता थे उनका जीवन गांधीजी को विरोध करने और भारतीयों के अधिकारों की मांग के लिए उनके अहिंसक तरीके के लिए जाना जाता था उन्होंने अपने कुछ सबसे कठिन समय के माध्यम से भारत का नेतृत्व किया जो अंततः 1947 में भारतीय स्वतंत्रता की ओर ले गया

🇮🇳🎄लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में रामदुलारी देवी व शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के घर हुआ था

11 जनवरी 1966 में ताशकंद उज़्बेकिस्तान में अकस्मात निधन हो गया 18 महीने प्रधानमंत्री रहे घर में सबसे छोटे होने के कारण लाल बहादुर शास्त्री जी का नाम नन्हे रखा गया था उनके पिता पेसे से स्कूली शिक्षक थे लाल बहादुर शास्त्री की उम्र लगभग 2 वर्ष होने पर पिता शारदा प्रसाद का निधन हो गया उसके बाद मां रामदुलारी देवी उन्हें व उनकी दो बहनों को नाना हजारीलाल के घर ले गई
लाल बहादुर के बचपन में ही साहस धैर्य आत्म संयम शिष्टाचार निस्वार्थ जैसे नैतिकता को प्राप्त किया उन्होंने मिर्जापुर में अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद वाराणसी गए अपने मामा के साथ रहे व मार्क्स रसेल और लेनिन जैसे विदेशी लेखकों को पढ़ने में अपना समय बिताते थे

लाल बहादुर प्रचलित जाति व्यवस्था के खिलाफ थे और इसलिए उन्होंने अपना उपनाम छोड़ने का फैसला किया 1925 में वाराणसी के काशी विद्यापीठ में स्नातक की पढ़ाई पूरी की तब उन्हें शास्त्री की उपाधि मिली जब से लोग लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जानते हैं 1928 में लाल बहादुर शास्त्री की ललिता देवी से शादी हुई दहेज व्यवस्था के सख्त खिलाफ थे उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया लेकिन अपने ससुर के बार-बार आग्रह करने पर 5 गज का खादी कपड़ा दहेज के रूप में स्वीकार किया शास्त्री जी के 6 बच्चे थे

स्वतंत्रता से पूर्व युवा लाल बहादुर राष्ट्रीय नेताओं की कहानी और भाषणों से प्रभावित थे उन्हें देश को गुलामी से मुक्त करने के लिए किए जा रहे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने की इच्छा हुई 1915 में महात्मा गांधी के एक भाषण से प्रभावित हुए और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए पढ़ाई को छोड़ दिया 1921 में असहयोग आंदोलन के समय लाल बहादुर को विशेषज्ञ के खिलाफ अवज्ञा का प्रदर्शन करने के लिए गिरफ्तार किया गया नाबालिक होने के अनुसार शास्त्री जी को अधिकारियों ने रिहा कर दिया

1930 में लाल बहादुर शास्त्री कांग्रेस पार्टी की स्थानीय इकाई के सचिव और बाद में इलाहाबाद कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने शास्त्री जी ने महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई घर-घर जाकर इस अभियान का नेतृत्व किया जिसमें लोगों ने अंग्रेजों को भू- राजस्व और करों का भुगतान न करने का आग्रह किया शास्त्री जी एक प्रमुख कांग्रेसी नेताओं में से थे जिन्हें 1942 में ब्रिटिश सरकार ने जेल में डाल दिया था कारावास में लंबे समय के दौरान लाल बहादुर शास्त्री ने समय का उपयोग समाज सुधारकों और पश्चिम दार्शनिकों को पढ़ने में किया

भारत के प्रधानमंत्री चुने जाने से पहले कई पदों पर कार्य किया भारत की आजादी के बाद वह उत्तर प्रदेश में गोविंद बल्लभ पंत मंत्रालय में पुलिस मंत्री बने उन्हें अनियंत्रित भीड़ को तीतर भीतर करने के लिए लाठियां के बजाय वाटर जेट का उपयोग करने के निर्देश दिए थे जिससे भीड़ को कोई नुकसान ना हो और काम भी हो जाए शांतिपूर्ण तरीके से काम करने से वह बहुत लोकप्रिय होने लगे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने शास्त्री जी को रेल मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी दी 1956 में लाल बहादुर शास्त्री ने तमिलनाडु में हरियालुर के पास एक ट्रेन दुर्घटना में लगभग 150 यात्रियों की मौत के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया उन्होंने इस रेल दुर्घटना की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली नेहरू जी ने कहा था कि लाल बहादुर शास्त्री से बेहतर साथी की कोई कामना नहीं कर सकता

1957 में पहले परिवहन और संचार मंत्री फिर वाणिज्य उद्योग मंत्री के रूप में काम किया 1961 में गृहमंत्री बने आर के संस्थानम की अध्यक्षता में उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण समिति का गठन किया जिम्मेदारी और कर्तव्यों को उन्होंने पूरी ईमानदारी और लगन से निभाया पंडित जवाहरलाल नेहरू की आकस्मिक मृत्यु के बाद सर्व सहमति से लाल बहादुर शास्त्री 9 जून 1964 को देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने

शास्त्री जी की नेहरूवादी समाजवाद के अनुयाई थे और विकट परिस्थितियों में भी शांति से समस्या हल करते थे प्रधानमंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री का कार्यकाल बहुत ही शानदार रहा आज भी उनके काम की उपलब्धियां गिनाई जाती हैं बचपन में शास्त्री जी ने भोजन की कमी बेरोजगारी और गरीबों जैसी कई प्राथमिक समस्याओं का भी सामना किया था भारत के खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए शास्त्री ने 1965 में भारत में हरित क्रांति को बढ़ावा दिया इससे खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई खासकर पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश राज्यों में उन्होंने विशेषज्ञों से दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने को कहा हरित क्रांति के अलावा उन्होंने श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

प्रधानमंत्री कार्यकाल में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का गठन किया 1962 के चीनी आक्रमण के बाद 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया 1962 के युद्ध में भारत चीन से हार गया पाकिस्तान की अयूब खान सरकार ने भारत को कमजोर समझ कर हमला कर दिया लाल बहादुर शास्त्री द्वारा बनाई गई रणनीति द्वारा भारत की सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया युद्ध में भारत की विजय हुई 23 सितंबर 1965 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा युद्ध विराम की मांग का प्रस्ताव पारित हुआ युद्ध विराम की मध्यस्थता पेशकश रूसी प्रधानमंत्री कोसियन ने की जिसमें शर्त रखी गई भारत एवं पाकिस्तान अपनी-अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगे अपने झगड़ों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाएंगे प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद देश में आर्थिक संकट था सुखा एवं अनाज का काल था उन्होंने देश की जनता से आह्वान किया कि हर हफ्ते उपवास रखें पूरे देश ने उपवास रखा और दिल्ली में दशहरा के समय जय जवान जय किसान का नारा दिया यह नारा राष्ट्रीय रूप में समर्पित हुआ शास्त्री जी का जीवन दुनिया के लिए प्रेरणा साबित हुआ

प्रधानमंत्री बनने पर परिवार के लोगों ने फिएट कार के लिए कहा ₹12000 की जरूरत थी लेकिन उनके पास ₹7000 थे पंजाब नेशनल बैंक से ₹5000 का लोन पास कराया उन्होंने बैंक से कहा यह सुविधा आम लोगों के लिए भी लागू की जाए 1 साल के बाद उनका निधन हो गया उनकी पत्नी ललिता देवी ने पेंशन से लोन चुकाया

साल 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग खत्म हुई थी जिसके बाद दोनों देशों के बीच ताशकंद में समझौता हुआ था यह समझौता 10 जनवरी 19 1966 को लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के अयूब खान ने ताशकंद घोषणा पर हस्ताक्षर किए जिसके 12 घंटे बाद ही 11 जनवरी 1966 को रात्रि में शास्त्री की मौत हो गई आधिकारिक तौर पर बताया गया कि लाल बहादुर शास्त्री की मौत हार्ड अटैक की वजह से हुई थी बताया जाता है शास्त्री जी की मृत्यु से पहले भी दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था उनकी पत्नी ललिता देवी ने आरोप लगाया कि शास्त्री को जहर दिया गया था और प्रधानमंत्री की सेवा करने वाले रूसी बटलर को गिरफ्तार कर लिया गया था बाद में उन्हें छोड़ दिया गया डॉक्टर ने प्रमाणित किया कि शास्त्री की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हुई है

मीडिया ने शास्त्री की मौत में सीआईए संलिप्तता का संकेत देते हुए एक संभावित षड्यंत्र सिद्धांत भी प्रसारित किया कि वह भारत के पहले प्रधानमंत्री थे जिनकी मृत्यु विदेश में हुई थी लाल बहादुर शास्त्री को 1966 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था

लाल बहादुर शास्त्री के कुछ मुख्य विचार आजादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं है पूरे देश को मजबूत होना होगा हमारे देश में आर्थिक मुद्दे उठाने बेहद जरूरी हैं हम अपने सबसे बड़े दुश्मन गरीबी और बेरोजगारी से लड़ सकते हैं हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास के लिए विश्वास करते हैं सच्चा लोकतंत्र और स्वराज कभी भी हिंसा और असत्य से प्राप्त नहीं हो सकता जब स्वतंत्रता और अखंडता खतरे में हो तो पूरी शक्ति से उसे चुनौती का मुकाबला करना ही एकमात्र कर्तव्य होता है हमें एक साथ मिलकर किसी भी प्रकार के अपेक्षित बलिदान के लिए दृढ़ता पूर्वक तत्पर रहना है देश की तरक्की के लिए हमें अब आपस में लड़ने के बजाय गरीबी व बीमारी और अज्ञानता से लड़ना होगा आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे जरूरी है जो शासन करते हैं उन्हें देखना चाहिए कि लोग प्रशासन पर किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं

अंतत: जनता ही मुखिया होती है जब स्वतंत्रता और अखंडता खतरे में हो तो पूरी शक्ति से उसे चुनौती का मुकाबला करना ही एकमात्र कर्तव्य होता है हमें एक साथ मिलकर किसी भी प्रकार के अपेक्षित बलिदान के लिए दृढ़तापूर्वक तत्पर रहना है मेरी समझ से प्रशासन का मूल विचार यह है कि समाज को एकजुट रखा जाए ताकि वह विकास कर सकें और अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ सकें

2 अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी 155 वी जयंती विश्व मना रहा है एवं लाल बहादुर शास्त्री जी 120 वी जयंती देश मना रहा है दोनों महानपुरुषों की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन

चौo शौकत अली चेची
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
भाकियू (अंबावता) एवं
पिछड़ा वर्ग उ0 प्र0 सचिव (सपा)

(यह लेखक के अपने विचार हैं।)

 

JHVP BHARAT NEWS

Parwez Alam: Editor in chief : JHVP BHARAT NEWS : A Passionate Soul with a Drive for Change Born on January 26, 1983, Parwez Alam is a dynamic individual with a multifaceted personality. With a postgraduate degree in hand, Parwez has always been drawn to the world of journalism and social work, driven by a desire to make a positive impact on society. When he's not working, Parwez indulges in his favorite hobby - cricket. An avid player, he finds solace in the thrill of the game. But that's not all - Parwez is also a creative force to be reckoned with. He enjoys writing stories, composing poems, and expressing himself through words. Parwez's passion for social justice is evident in his work as a political activist. He is an outspoken advocate for change and uses his voice to raise awareness about important issues. In today's digital age, he leverages social media platforms to spread his message and connect with like-minded individuals. Through his various pursuits, Parwez Alam embodies the spirit of a true change-maker. His dedication to journalism, social work, and political activism is inspiring, and his creative side makes him a unique and fascinating individual. 9931481554, 9709287354,6202433405,9097947125,7870527125

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!