अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘रेड एरो’ वाला मिलिट्री मैप शेयर किए जाने और फिर खाड़ी देशों के अनुरोध पर हमले को कुछ समय के लिए टालने के दावों के बीच एक बेहद डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्धविराम इस समय बारूद के ढेर पर खड़ा है....'द न्यू यॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर दोबारा हवाई हमले शुरू किए, तो इस बार ईरान का पलटवार बेहद विनाशकारी होने वाला है.

JHVP BHARAT NEWS/ WORLD IN WAR UPDATES
EDITED BY : PARWEZ ALAM
Iran Retaliation Plan: मिडिल ईस्ट में जारी युद्धविराम इस समय बारूद के ढेर पर खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘रेड एरो’ वाला मिलिट्री मैप शेयर किए जाने और फिर खाड़ी देशों के अनुरोध पर हमले को कुछ समय के लिए टालने के दावों के बीच एक बेहद डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर दोबारा हवाई हमले शुरू किए, तो इस बार ईरान का पलटवार बेहद विनाशकारी होने वाला है। ईरान इस बार सिर्फ इजरायल को नहीं, बल्कि UAE, सऊदी अरब और कुवैत जैसे अमीर खाड़ी देशों को निशाना बनाने की प्लानिंग कर चुका है। ईरान का मकसद दुनिया की पूरी अर्थव्यवस्था और तेल सप्लाई चेन को तहस-नहस करना है।
‘लंबा नहीं चलेगा अगला युद्ध, होगी भयंकर तबाही’
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के सुरक्षा विशेषज्ञ हामिदरेजा अजीजी के मुताबिक, इस साल के शुरूआती दौर की जंग में ईरान का अनुमान था कि लड़ाई कम से कम 3 महीने चलेगी। इसलिए उसने अपने मिसाइलों के जखीरे को बचा-बचाकर इस्तेमाल किया था।
लेकिन अब ईरान की सैन्य सोच पूरी तरह बदल चुकी है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अगला युद्ध भले ही छोटा हो, लेकिन बेहद तीव्र और भीषण होगा। ईरान को अंदेशा है कि अमेरिका इस बार सीधे उसके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर तेल और बिजली ग्रिड को तबाह करने की कोशिश करेगा। इसीलिए, ईरान अब युद्ध की शुरुआत से ही अपने सबसे घातक हथियारों और मिसाइलों से ‘अंधाधुंध और चौतरफा’ हमला शुरू कर देगा।
UAE को लेकर ईरान ने बनाया ये खौफनाक प्लान
ईरान के सुरक्षा बलों के करीबी माने जाने वाले रक्षा विशेषज्ञ मेहदी खरातियान ने एक पॉडकास्ट में UAE को लेकर एक खतरनाक धमकी दी है। उन्होंने कहा है, ‘अगर ईरान पर दोबारा हमला हुआ, तो हम अमीरात को मारकर फिर से ‘ऊंट की सवारी करने वाले पुराने दौर’ में पहुंचा देंगे। जरूरत पड़ी तो ईरान, अबू धाबी पर कब्जा भी कर सकता है।’
अमीरात और सऊदी अरब पर क्यों भड़का है ईरान?
ईरान का मानना है कि यूएई ने अपनी धरती पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने की इजाजत दी है। इसके अलावा, खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सऊदी अरब और यूएई ने पिछले दिनों हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों में खुफिया रूप से मदद की थी। इसी नाराजगी के कारण ईरान हर दिन खाड़ी देशों के तेल कुओं, रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर सैकड़ों मिसाइलें दागने का प्लान बना चुका है, जिससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल का महासंकट खड़ा हो जाएगा।
एक नहीं, अब दो ‘समुद्री मोर्चों’ पर घेराबंदी की तैयारी
ईरान अब अमेरिका को केवल होर्मुज में नहीं, बल्कि दो अलग-अलग समुद्री मोर्चों पर घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है:
होर्मुज जलमार्ग: यहां ईरान पहले ही अपना नया संगठन ‘PGSA’ बनाकर जहाजों से टैक्स वसूलने और नाकेबंदी करने का एलान कर चुका है।
बाव-अल-मंडेब जलडमरूमध्य: यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला वो संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का 10% व्यापार होता है। ईरान यहां अपने समर्थित यमन के हुती विद्रोहियों के जरिए अमेरिकी और यूरोपीय जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज करवा सकता है। दो मोर्चों पर एक साथ मरीन ब्लॉक होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।



