PM किसान 21वीं किस्त पर बड़ा फसला, फाइनल तारीख घोषित आज का अखबार देखें।
देशभर के करोड़ों किसानों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त को लेकर काफी उत्साह है।

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ACCURATED BY: परवेज़ भारतीय

देशभर के करोड़ों किसानों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त को लेकर काफी उत्साह है। केंद्र सरकार ने अब इस किस्त की तारीख तय कर दी है, जिसके तहत किसानों के बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपये की राशि भेजी जाएगी। यह रकम खेती से जुड़े खर्चों में किसानों को राहत देने के लिए दी जा रही है। पीएम किसान योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का बड़ा जरिया बन चुकी है जो उन्हें खेती के कार्यों में निरंतरता बनाए रखने में मदद करती है।
आपदा प्रभावित राज्यों को मिली प्राथमिकता
सरकार ने इस बार सबसे पहले उन राज्यों के किसानों को राशि जारी की है जो हाल ही में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए थे। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भारी वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था। इन राज्यों के किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने पहले ही किस्त जारी कर दी है ताकि वे अपनी फसलों की पुनर्बहाली कर सकें। यह फैसला सरकार की संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
अन्य राज्यों के लिए तय हुई तिथि
बाकी राज्यों के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, सरकार बिहार विधानसभा चुनावों से पहले भुगतान प्रक्रिया पूरी करना चाहती है ताकि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। पहले अनुमान था कि यह किस्त दीपावली से पहले जारी की जाएगी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों के चलते तारीख नवंबर में तय की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी पात्र किसानों को बिना देरी सहायता राशि प्राप्त हो।
ई-केवाईसी और बैंक लिंकिंग जरूरी
21वीं किस्त की राशि केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी जिनका ई-केवाईसी पूरा है और जिनका बैंक खाता आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है। यदि किसी किसान ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है तो उसे इस किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए सभी किसानों को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द अपना ई-केवाईसी करवाएं और बैंक खाते को आधार से लिंक कराएं ताकि भुगतान में कोई अड़चन न आए। यह प्रक्रिया धोखाधड़ी रोकने और सही लाभार्थी तक पैसा पहुंचाने के लिए आवश्यक है।
प्रधानमंत्री किसान योजना का उद्देश्य और लाभ
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना 2019 में शुरू की गई थी ताकि छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता मिल सके। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की राशि दी जाती है, जो तीन किस्तों में 2,000 रुपये के रूप में उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। यह योजना किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों की पूर्ति में मदद करती है और उनकी खेती की लागत को कम करती है।
योजना की उपलब्धियां और प्रभाव
अब तक इस योजना की 20 किस्तें सफलतापूर्वक जारी की जा चुकी हैं और 10 करोड़ से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिला है। इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और किसानों की आय में स्थिरता लाई है। इसके चलते किसान बिना किसी कर्ज के अपनी खेती में निवेश कर पा रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
किस्त की स्थिति ऐसे जांचें
किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाकर अपनी भुगतान स्थिति जांच सकते हैं। यहां वे यह देख सकते हैं कि उनकी किस्त जारी हुई है या नहीं। इसके अलावा राज्य के कृषि विभाग के पोर्टल पर भी यह जानकारी उपलब्ध होती है। जिन किसानों के दस्तावेज या बैंक लिंकिंग अधूरी है, वे इस किस्त से वंचित रह सकते हैं, इसलिए समय-समय पर रिकॉर्ड अपडेट करना जरूरी है।

वर्तमान बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की कलम से एक विशेष सन्देश पढ़िए
आज आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ कर्पूरी ग्राम, समस्तीपुर पहुंचकर भारत रत्न, जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
राजनीति में शुचिता एवं सादगी के प्रतीक और सामाजिक न्याय के लिए अभूतपूर्व प्रयास करने वाले कर्पूरी ठाकुर जी हम सबके प्रेरणास्रोत हैं। हमलोग उनके आदर्शों पर चल रहे हैं। उनके सपनों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं।
हमलोग शुरू से कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ सम्मान देने की मांग कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस की केंद्र सरकारों ने उसे नहीं माना। बाद में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एन0डी0ए0 सरकार ने ही कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। आज कल कुछ लोग अब स्वयं को जननायक घोषित कर असली जननायक को अपमानित करने का प्रयास कर रहे हैं। कर्पूरी ठाकुर जी जैसे विराट व्यक्तित्व के अपमान का राजद और महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों द्वारा मौन समर्थन करना शर्मनाक है।
नई पीढ़ी को जानना चाहिए कि बिहार में 15 नवंबर 1978 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जी ने जब पिछड़ों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया था, उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया था।

आज उसी कांग्रेस के साथ राजद का गठबंधन है, क्योंकि राजद के शीर्ष नेता भी शुरू से ही अति पिछड़ों को आरक्षण देकर आगे बढ़ाने के विरोधी रहे। कर्पूरी जी द्वारा वर्ष 1978 में सरकारी सेवाओं में पिछड़े वर्ग के लोगों को 8 प्रतिशत तथा अति पिछड़े वर्ग के लोगों को 12 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया। वर्ष 1993 में जब यह पता चला कि बिहार में भी मंडल कमीशन की तर्ज पर अति पिछड़ों एवं पिछड़ों को एक वर्ग में डालने की बात हो रही है तो मैंने साफ तौर पर इसका विरोध किया। 24 जनवरी 1993 को हमने स्पष्ट रूप से कह दिया कि कर्पूरी जी के द्वारा जो आरक्षण लागू किया गया है, उसमें अगर कोई छेड़छाड़ होगी और उसमें अगर कोई परिवर्तन करने की कोशिश होगी तो हमलोग इसका पूरजोर विरोध करेंगे।
बिहार की जनता ने जब नवंबर 2005 में मुझे मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया, उसके बाद मैंने पंचायतों में महिलाओं और अति पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया। पिछले चार पंचायत चुनावों में लाखों महिलाओं एवं वंचित तबकों के लोगों को नेतृत्व का अवसर मिला, जिससे गांव-समाज में उनका सम्मान बढ़ा, उनकी आवाज बुलंद हुई।

पिछले 20 वर्षों में हमने ‘न्याय के साथ विकास’ की नीति के तहत बिना किसी भेदभाव के, समाज के वंचित तबकों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम किया है। इसके लिए अनेक दूरगामी योजनाओं की न केवल शुरूआत की, बल्कि उनका कारगर कार्यान्वयन भी सुनिश्चित किया है। इस तरह हमने वंचित तबकों के उत्थान के कर्पूरी जी के सपनों को धरातल पर साकार करने के लिए हरसंभव प्रयास किया है और आगे भी करते रहेंगे।


