…. तो क्या आ गयी प्रलय की घड़ी, ख़त्म हो रहा है इंसानियत का समय. डुमसडे क्लॉक अपडेट पर थमी.. दुनिया की साँसे
डूम्सडे’ यानी प्रलय की घड़ी का आविष्कार

JHVP BHARAT NEWS /WORLD WATCH TIME
ACCURATED BY: परवेज़ भारतीय
जब दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका से उबर रही थी तभी ‘द बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ के सदस्यों ने ‘डूम्सडे’ यानी प्रलय की घड़ी का आविष्कार किया. यह घड़ी इस बात का प्रतीक है कि दुनिया के अंत (प्रलय) के कितने दिन और बचे हैं? यह घड़ी शिकागो यूनिवर्सिटी में टंगी है. इस घड़ी के माध्यम से परमाणु युद्ध और जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया में आने वाले खतरों के बारे में अनुमान लगाया जाता है. साल 1947 से हर साल वैज्ञानिक घड़ी को रीसेट करते हैं. इस साल 27 जनवरी को डूम्सडे क्लॉक को अपडेट किया जाएगा. इसके साथ ही इस बात की भी जानकारी मिलेगी कि अब दुनिया को खत्म होने में कितना समय और शेष है.
इस इवेंट को बुलेटिन ऑफ़ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स (BAS) 3 pm GMT (8:30 pm IST) पर लाइव-स्ट्रीम करेगा. यह संस्था घड़ी का समय तय करने के लिए ज़िम्मेदार है, जो धीरे-धीरे मानवता के विनाश की ओर बढ़ रही है. पिछले साल, इसे आधी रात से 89 सेकंड पहले सेट किया गया था. डूम्सडे क्लॉक का मकसद शुरू में सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध के जोखिम को ट्रैक करना था. हालांकि, आज दुनिया जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी इंसानों द्वारा बनाई गई चीज़ों से खतरे में है, जिससे डूम्सडे क्लॉक प्रासंगिक हो गई है. डेली मेल ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि 27 जनवरी को घड़ी के आधी रात के और करीब जाने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि दुनिया अपने अंत के एक और कदम करीब आ जाएगी.
दुनिया में चल रहे युद्धों के बीच मानवता की दुर्गति
दुनिया में चल रहे युद्धों के बीच मानवता के लिए हालात खराब दिख रहे हैं. ईरान और इज़राइल एक और संघर्ष के कगार पर हैं तनाव बहुत ज़्यादा है, रूस-यूक्रेन संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है और डोनाल्ड ट्रंप और उनकी ग्रीनलैंड की योजनाएं एक सैन्य घटना को ट्रिगर कर सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि घड़ी कम से कम एक सेकंड आगे बढ़ेगी और सबसे बड़ा ‘अस्तित्व का संकट’ परमाणु हथियारों से है. इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स की पॉलिसी हेड एलिसिया सैंडर्स-ज़ैक्रे ने आउटलेट को बताया, ‘मेरी राय में घड़ी को कम से कम एक सेकंड आगे बढ़ाया जा सकता है.’
परमाणु हथियार डूम्सडे क्लॉक को आगे बढ़ाते हैं
पिछले साल भी घड़ी के आगे बढ़ने का कारण परमाणु जोखिम ही था। हालांकि, एलिसिया का कहना है कि पिछले एक साल में स्थिति “परमाणु हथियारों में बढ़ते निवेश” के कारण और खराब हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि घड़ी कई सेकंड आगे बढ़ेगी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ एक्सिस्टेंशियल रिस्क के शोधकर्ता डॉ. एसजे बियर्ड का कहना है कि “दुनिया की महाशक्तियों” के बीच परमाणु संघर्ष की बहुत ज़्यादा संभावना है और इसलिए घड़ी कम से कम नौ सेकंड आगे बढ़ सकती है.
क्या है डूम्सडे क्लॉक?
डूम्सडे क्लॉक यह मापती है कि दुनिया इंसान की बनाई तबाही के कितने करीब है. इसे जून 1947 में अमेरिकी कलाकार मार्टिल लैंग्सडॉर्फ ने बुलेटिन ऑफ़ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स जर्नल के कवर के तौर पर बनाया था. ‘डूम्सडे क्लॉक’ को लेकर वैज्ञानिकों कहते हैं कि इसका उद्देश्य लोगों और संस्थानों को बेहतर कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है. दुनिया के लोगों को आने वाले खतरों के बारे में सजग रहने के लिए ये क्लॉक बनाई गई है. अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे. तब उस हमले में लगभग एक लाख लोगों मारे गए थे. वैज्ञानिक उस समय को परमाणु युग की शुरुआत कहते हैं. तब वैज्ञानिकों को इस बात का एहसास हुआ कि उन्होंने ये विनाशक हथियार बना दिया है. तब इस घड़ी का निर्माण किया गया और इसके पीछे की वजह तकनीक के अनियंत्रित इस्तेमाल के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास था. इस घड़ी की स्थापना को धीरे-धीरे 80 साल पूरे होने वाले हैं. इस घड़ी का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक करना है.




